कृषि अधिकारी संघ ने की कार्रवाई की मांग
जांजगीर चांपा , कृषि विभाग में 2021 में ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी से कृषि विकास अधिकारी में 235 अधिकारियों की पदोन्नति प्रशासन नियम में 2018 में किए गए संशोधन के आधार पर की गई थी।
इस पदोन्नति के विरोध में ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी संघ ने कई महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाते हुए उच्च न्यायालय बिलासपुर में याचिका दायर की थी, जिसमें उच्च न्यायालय द्वारा पदोन्नति नियम में संशोधन को
अल्ट्रा वायरस कर दिया था। उच्च न्यायालय के उक्त निर्णय के विरोध में छ.ग. शासन ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर अपना पक्ष रखा कि कृषि स्नातकों की नियुक्ति-गुण नियंत्रण हेतु निरीक्षक के तौर पर करना आवश्यक होने के कारण नियमानुसार अलग-अलग योग्यता की अलग वरिष्ठता सूची संधारित कर पदोन्नति किया गया है। उच्चतम न्यायालय ने बाद दायर करने वाले 4 प्रतिवादियों को पदोन्नति सूची में शामिल करने एवं उच्च न्यायालय के निर्णय को अंतिम कानूनी रूप न देते
हुए केवल 4 प्रतिवादियों तक ही सीमित रखा। उक्त निर्णय की गलत व्याख्या करते हुए ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी संघ के द्वारा अनर्गल एवं मनगढ़त व्याख्या करते हुए सोशल मीडिया एवं कुछ समाचार पत्रों में पदोन्नत्ति निरस्त करने संबंधी झूठी खबरें प्रकाशित करवाई जा रही है जो कि माननीय उच्चतम न्यायालय की स्पष्ट अवमानना है। छग कृषि स्नातक शासकीय कृषि अधिकारी संघ ने इसका पुरजोर विरोध करते हुए शासन को ज्ञापन सौंपते हुए ऐसे कृत्य करने वाले संघ के अध्यक्ष विजय लहरे पर कार्यवाही की मांग की है।








