बाघमार, भटगुना और साल्हे घाट में खुलेआम खनन, होली के दौरान तेज हुई गतिविधियां,नदियों का सीना चीर रहे रेत माफिया, रोज 50-60 ट्रॉली अवैध रेत का परिवहन
राजस्व को लाखों की चपत शिकायतों के बाद भी कार्रवाई नहीं
धनंजय गोस्वामी
डोंगरगांव क्षेत्र की नदियों से बिना रायल्टी के रेत का अवैध खनन और परिवहन धड़ल्ले से जारी है। ग्रामीण क्षेत्रों में नदी तटों का सीना चीरकर दिनदहाड़े रेत निकाली जा रही है। जिम्मेदार विभागों द्वारा कभी-कभार केवल परिवहन कर रही ट्रैक्टर-ट्रॉलियों पर कार्रवाई की जाती है, लेकिन मौके पर जाकर खनन रोकने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है। इससे रेत माफियाओं के हौसले लगातार बुलंद होते जा रहे हैं।
जानकारी के अनुसार ग्राम बाघमार, भटगुना और साल्हे घुघुवा के साल्हे घाट में दिनभर नदी तट से रेत निकालकर ट्रॉलियों में भरने का काम खुलेआम चल रहा है। ग्रामीणों की मौजूदगी में ही नदी किनारों को छलनी कर रेत निकाली जा रही है और गांवों में अलग-अलग स्थानों पर डंप की जा रही है। पूरे दिन नदी किनारे यही नजारा देखने को मिल रहा है।
होली की छुट्टियों में बढ़ा अवैध खनन
ग्रामीणों का कहना है कि होली त्योहार के दौरान अधिकारियों की छुट्टी का फायदा उठाकर रेत माफियाओं ने खनन और परिवहन का काम और तेज कर दिया है। गांवों के आसपास कई जगहों पर रेत के बड़े-बड़े ढेर डंप कर दिए गए हैं, जिन्हें बाद में धड़ल्ले से बेचा जा रहा है। इसकी जानकारी कई बार संबंधित अधिकारियों को दी जा चुकी है, लेकिन अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई है।
रोजाना लाखों के राजस्व की चोरी
क्षेत्र की नदियों से प्रतिदिन लगभग 50 से 60 ट्रॉली अवैध रेत का परिवहन किया जा रहा है। इससे सरकार को हर दिन लाखों रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस अवैध खनन की जानकारी खनिज और राजस्व विभाग के अधिकारियों को भी है, इसके बावजूद कार्रवाई नहीं होना कई सवाल खड़े करता है।
स्थानीय नेताओं की भूमिका की चर्चा
ग्रामीणों के अनुसार इस अवैध कारोबार में कुछ स्थानीय नेताओं की भूमिका भी बताई जा रही है। लगातार शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं होने से लोगों में नाराजगी बढ़ रही है।
पर्यावरण के लिए बन रहा खतरा
विशेषज्ञों के अनुसार नदियों से अंधाधुंध रेत दोहन से मृदा अपरदन, बाढ़ का खतरा और जल संकट जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। यदि समय रहते इस पर रोक नहीं लगी तो आने वाले समय में प्राकृतिक संसाधनों को भारी नुकसान हो सकता है।
गांवों में डंप कर छिपा रहे रेत
रेत माफिया प्रशासन की नजर से बचने के लिए रेत को गांवों के कुछ घरों और खाली स्थानों के पास डंप कर रहे हैं। शहरों में निगरानी ज्यादा होने के कारण ग्रामीण इलाकों को अवैध रेत कारोबार का सुरक्षित ठिकाना बना लिया गया है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से अवैध रेत खनन और परिवहन पर तत्काल रोक लगाने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की है।








