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जिले में पत्रकारों की अनदेखी, समिति बनी सत्ता संतुलन का मंच

अनूपपुर - योजना एवं सांख्यिकी विभाग की जिला विकास सलाहकार समिति की नई सूची जारी होते ही अनूपपुर में बवाल मच गया है। जिले के पत्रकार समुदाय में नाराजगी है—कारण साफ़ है, पूरे जिले से एक भी पत्रकार को समिति में शामिल नहीं किया गया!


जहां दूसरे जिलों में पत्रकारों, शिक्षाविदों और समाजसेवियों को प्रतिनिधित्व मिला है, वहीं अनूपपुर में समिति का चेहरा एकदम राजनीतिक दिख रहा है। समाजसेवा के नाम पर बीजेपी से जुड़े चेहरों को तरजीह दी गई है, और कई ऐसे लोग शामिल कर लिए गए हैं जो पार्टी की कार्यसमिति से वंचित रह गए थे।


भाजपा कार्यकर्ताओं का पुनर्वास केंद्र बन गई समिति?


स्थानीय जानकारों का कहना है कि यह समिति विकास की बजाय सत्ता समीकरण साधने का जरिया बन गई है। कई नाम ऐसे हैं जिनकी समाजसेवा या विकास से जुड़ी कोई ठोस पृष्ठभूमि नहीं है।

एक वरिष्ठ पत्रकार ने तंज कसते हुए कहा, “ये सलाहकार समिति नहीं, भाजपा के ‘समायोजन बोर्ड’ जैसी लगती है।”


पत्रकारों की उपेक्षा पर उठ रहे सवाल


अनूपपुर प्रेस क्लब और स्वतंत्र पत्रकार संगठन इस पर नाराज हैं। उनका कहना है कि पत्रकार हमेशा ज़मीनी सच्चाइयों और विकास योजनाओं के प्रभाव को जनता तक पहुँचाते हैं, फिर भी उन्हें इस समिति से दूर रखना जिले की पत्रकारिता का अपमान है।

कई पत्रकारों ने यह भी सवाल उठाया है कि अगर बाकी जिलों में मीडिया प्रतिनिधि समिति का हिस्सा हो सकते हैं, तो अनूपपुर में ऐसा क्यों नहीं?


जिले में ",,,,,,,,,,,,,,,," खेल, प्रशासन मजे में!


चर्चा यह भी है कि जिले में इन दिनों ",,,,,,,,,,,,,,,,,,," का खेल चल रहा है—जहां सरकारी कामकाज और समितियों में एक ही विचारधारा का दबदबा साफ दिख रहा है। प्रशासन अपनी सुविधानुसार निर्णय ले रहा है


जनता का सवाल — “फिर विकास की सलाह कौन देगा?”


जब समिति का गठन ही एकतरफा है, तो विकास की दिशा पर सार्थक सलाह कैसे मिलेगी? यह बड़ा सवाल अब जिलेभर में चर्चा का विषय बन गया है।

लोगों का कहना है कि जिला विकास सलाहकार समिति जनता की आवाज़ बनने के बजाय “राजनीतिक पोस्टिंग बोर्ड” बन चुकी है — और इसका सीधा असर योजनाओं की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर पड़ेगा।


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